Tag Archives: महाकाव्य

महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : उत्तर काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड उत्तर काण्ड शम्भूका मुख देखि राज्य अभिषेक् राम्को सुनीथिन् जसै। सोधिन् पार्वतिले सदाशिवजि थ्यैं लीला पछीका तसै॥ … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : युद्ध काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड युद्ध काण्ड लङ्कापुरी सकल खाग् गरि सैन्य मारी। फेरी समुद्र सहजै तरि आइ वारी॥ सीताजिको जब सबै … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : सुन्दर काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड सुन्दर काण्ड तर्छू क्षार समुद्र आज सहजै भन्न्या इरादा धरी। श्रीराम्का चरणारविन्द मनले अत्यन्त चिन्तन् गरी॥ भन्छन् … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : किष्किन्धा काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड किष्किन्धा काण्ड जस्सै मुक्त भई गइन् ति शबरी सब् बात् सुनी राम् पनी। जान्छू आज म ऋष्यमूक … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : अरण्य काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड अरण्य काण्ड अत्रीका आश्रमैमा बसि रघुपतिले प्रेमले दिन् बिताई। दोस्रा दिन्मा सबेरै उठि कन वनमा जान मन्सुब् … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : अयोध्या काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड अयोध्या काण्ड एकान्त स्थलमा सितापति थिया सीता हजुर्मा रही। हात्मा चामर ली प्रभू कन तहाँ हाँक्थिन् समीप्मा … Continue reading →

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महाकाव्य : भानुभक्त रामायण : बाल काण्ड

~भानुभक्त आचार्य~ (१) बाल काण्ड (२) अयोध्या काण्ड (३) अरण्य काण्ड (४) किष्किन्धा काण्ड (५) सुन्दर काण्ड (६) युद्ध काण्ड (७) उत्तर काण्ड बाल काण्ड एक् दिन् नारद सत्यलोक् पुगि गया, लोक्को गरूँ हित् भनी। ब्रह्मा ताहिं थिया पर्या चरणमा, … Continue reading →

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महाकाव्य : सिंहवाहिनी

समीक्षात्मक पौराणिक महाकाव्य | सिंहवाहिनी | सदानन्द “अभागी” सिंहवाहिनी (समीक्षात्मक पौराणिक महाकाव्य) सदानन्द “अभागी” कावासोती ७ शान्तिचोक नवलपरासी लुम्वनी अञ्चल, नेपाल २०७३ (२०१६) कृति : सिंहवाहिनी (समीक्षात्म पौराणिक महाकाव्य) कृतिकार : सदानन्द “अभागी” प्रकाशक : दाउने सप्ताहिक प्रथम संस्करण : … Continue reading →

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