Tag Archives: रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’ – Rambharos Kapadi ‘Bhramar’

मैथिली गजल : एखन बाँकी अछि

~रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’~ करिछौंह मेघके फाटब, एखन बाँकी अछि चम्कैत बिजलैँकाके सैंतब, एखन बाँकी अछि उठैत अछि बुलबुल्ला फूटि जाइछ व्यथा बनि पानिके अड़ाबे से सागर, एखन बाँकी अछि

विधा : मैथिली गजल | | प्रतिकृया छोड्नुहोस्

कथा : भ्यालेन्टाइन गुलाब

~रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’ ~ मैतीदेवी चोकमा रङ्गीचङ्गी उपहार सामग्रीहरू बिक्री भइरहेका थिए। युवक-युवतीहरू एक-अर्कालाई पाखा लगाउँदै सामग्री चयनमा व्यस्त थिए। म टक्क उभिन्छु। के मलाई केही लिनुपर्दैन? फेरि आफैँसँग प्रश्न गर्दछु कसका लागि? साँच्चै, कसका निमित्त! यी सामग्रीहरू कुनै रहरले … पढ्नेक्रम जारी राख्नुहोस् ..

विधा : नेपाली कथा | | प्रतिकृया छोड्नुहोस्