Tag Archives: Maithali Kabita

मैथिली कविता : मधेशी

~विनीत ठाकुर~ गाम–नगर में सोरसराबा सुनल गेल बड़ बेसी लोकतन्त्र में अपन अधिकार लऽकऽ रहत मधेशी जनसंख्या सँ जनसागर में जोरल छलांै हम सीधा

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मैथिली कविता : संघर्ष

~विनीत ठाकुर~ संघर्षक पथ पर हौसला बुलन्द अछि जीत आव लग अछि नै कानु माय जल्दिए लौटव हम अधिकार प्राप्तिक संग अहाँक शरण मे ।

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मैथिली कविता : बापक ब्यथा

~रंजित निस्पक्ष~ केहन निर्लज तों भेले ओली, बापक नाम हँसेले रै ! केहन बंशमें जन्म भेलौ तोहर, खन्दानक नाम घिनेले रै ! बढ घिर्णित हम भेनौ ओली, जे जन्म देलियौ हम तोरा रै ! अई स बरहिंया निपुतरे रहितौं, नै … पढ्नेक्रम जारी राख्नुहोस् ..

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मैथिली कविता : शान्ति सन्देश

~विनीत ठाकुर~ ए ! शान्तिदूत परवा उड़िकऽ आ अप्पन देशमे फैलऽवै तों शान्ति हिमाल, पहाड़ आ मधेशमे एतऽकेँ सभ नर–नारी अछि शान्तिकेँ पूजारी सहत कोना हिंशा पसरल अछि समस्या भारी हिमालक अमृत जलमे मिलिगेल शोनितकेँ धारा

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मैथिली कविता : जाइतक टुकरी

~विनीत ठाकुर~ जाइतक टुकरी नै ऊँच–नीच महान् छी हम सब मैथिल मिथिला हमर शान होइ छै एकेटा धरती एकेटा आकाश पिवैत छी सबकिओ एकेटा बतास चाहे ओ पंडित हो, पादरी आ खान

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मैथिली कविता : प्रजातन्त्र रामलीलाक मञ्च

~रोशन जनकपुरी~ सन्दर्भ : वर्तमान १) देश खीरा जे ऊपर सँ सौँस होइछै आ भीतर सँ फाँकफाँक । २) राजनीति

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मैथिली कविता : चहुँदिश अमङ्गल

~विनीत ठाकुर~ स्वार्थेबस मानव उजारलक ओ जङ्गल । तैं धरती पर देखल चहुँदिश अमङ्गल ।। ठण्ढी में कनकनी गर्मी में अधिक गर्मी । नदी नाला के आब बन्द भऽ गेल सर्बी ।।

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मैथिली कविता : कम्प्यूटरक दुनिया

~विनीत ठाकुर~ ईन्टरनेट, ईमेल कम्प्यूटर के दुनिया । च्याटीङ्ग पर भेटल हमर ललमुनिया ।। नाम ओकर भाई जेहने छै अलका । तेहने ललितगर केश ओकर ललका ।।

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मैथिली कविता : भरल नोर में

~विनीत ठाकुर~ केहन सपना हम मीता देखलौँ भोर में । माय मिथिला जगाबथि भरल नोर में ।। कहथि रने वने घुमी अपन अधिकार लेल । छैं तूँ सुतल छुब्ध छी तोहर बिचार लेल ।।

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मैथिली कविता : कोरो आ पाढि

~विनीत ठाकुर~ गरीब छोरि कऽ के बुझतै गरीबीके मारि । ओ तऽ पेटे लेल जरबै छै कोरो आ पाढि़ ।। भेल छै स्वार्थी सब नेता अपने स्वार्थे में चूर । छिनलकै जे सपना सुख भऽ गेलैक कोसो दूर ।।

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मैथिली कविता : गाम–नगर में

~विनीत ठाकुर~ गाम–नगर में सोरसराबा सुनल गेल बड़ बेसी । लोकतन्त्र में अपन अधिकार लऽकऽ रहत मधेशी ।। जनसंख्या सँ जनसागर में जोरल छलौं हम सीधा । खाकऽ हमहुं लाठी गोली पारकेलौं सबटा बाधा ।। बटवृक्षक अंकुर बनि जनमल कतेको … पढ्नेक्रम जारी राख्नुहोस् ..

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मैथिली कविता : हम युद्ध नहीं जित सकल छी

~नन्दलाल आचार्य~ (१) शान्ति आ सुव्यवस्थाकेँ अस्त्र बनेलिही केलही, बहुत केलही सभकऽ मनमनमे ढोल बजेलिही जीवनमे बारम्बार भूकम्प आनलिही सडक गरमेलही, निद्रा उडेलही सपना बाटलिही, अस्थिर भविष्य देलही कमै चेतना दैक ललिपप चटवैत तन, मन, धन लेलही, कोनकोनसँ समर्थन भेटलिही … पढ्नेक्रम जारी राख्नुहोस् ..

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मैथिली कविता : ओ शान्ति छि’

~गजेन्द्र गजुर~ सर्वत्र सँऽ भगाय ल, मधेश मे आइब नुकाय ल, तबो जे छिन लेल क, ओ शान्ति छि ॥ जनह तन युद्ध-एनह गोहारि, गर्दमगोल भ पडय मारि, अन्तमे छाती मे समालि, बाकी रहल,

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मैथिली कबिता : अपन मधेश

~गजेन्द्र गजुर~ देख वृकति यही देशके, दिनानु दिन विग्रले जाय अपन मधेशके ॥ सब एक जुट निर्माण करब स्वदेश के, हरियर आवास बनायब अपन मधेशके॥ देख वृकति…

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मैथिली कविता : जागुऊ मधेश।।

~गजेन्द्र गजुर~ निकाइल सबटा गौहमन कऽ बिख, किए क त शोणित मे दिए मधेश लिख, बान्हल हाथ कऽ टुट्ल न राइस, पैर भाइज तौँ कि फेरो त गेलु फाइस॥

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मैथिली कविता : वृद्ध–वृद्धा

~विनीत ठाकुर~ वृद्ध–वृद्धा थिक घरक बडेÞरी छथि समाजमे देव समान । सदा ओ सोचथि सभक हिक करथि जन–जनकेँ कल्याण ।। कौवा कुचरऽसँ पहिने उठिकऽ गावथि नित भोर पराती । टोल परोशक निन्नकेँ तोरैत जगावथि बेटा, पोती, नाती ।। पोछैत पसिना … पढ्नेक्रम जारी राख्नुहोस् ..

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मैथली कविता : आन्हर केँ शहर मे

~विनीत ठाकुर~ ऐना केँ कि मोल आन्हर केँ शहर मे । भेल उन्टा मुँह सुन्टा अपने नजरि मे । ज्ञानक शुरमा लगाकऽ जे बजबैय गाल । व्यवहार में देखल ओकरो उहे ताल ।।

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