Tag Archives: Dhirendra Premarshi

पुस्तक समीक्षा : साहित्यमा मधेशको संवेदना

~धीरेन्द्र प्रेमर्षि~ “नेपाली साहित्यमा हाम्रो अनुहार छैन” भन्ने मधेशीहरू लू र सङोर पढेर आफ्नो संवेदना चित्रण गर्न आफैं अग्रसर हुन सक्छन्। तराई–मधेशको सम्पदा र संवेगबाट देशले पर्याप्त लाभ लिइरहे पनि कृतज्ञता प्रकट गर्न कञ्जुस्याईं गरेको अनुभव हुन्छ, राजनीतिमा मात्र हैन … Continue reading

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मैथिली गजल : पिअरगर यौ

~धिरेन्द्र प्रेमर्षि~ जोरजुलुमसँ जे ने झुकए से भाले लगए पिअरगर यौ इन्द्रधनुषी एहि दुनियामे लाले लगए पिअरगर यौ ठोरे जँ सीयल रहतै तँ गुदुर–बुदुर की हेतै कपार! एहन मुर्दा शान्तिसँ तँ बबाले लगए पिअरगर यौ कुच्ची–कलमक रूप सुरेबगर रहलै, रहतै … Continue reading

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मैथिली गजल : जर्सी छी

~धीरेन्द्र प्रेमर्षि~ सिहकैत कनकन्नीमे सीटर छी, जर्सी छी मखा-मखा प्रेम करी, मोनक प्रेमर्षि छी चानक धियानमे धरती नहि छूटए, तेँ डिहबारक भगता हम दूरक ने दर्शी छी

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मैथिली गजल : कुच्चा छै

~धिरेन्द्र प्रेमर्षि~ शासनके लोडहीतर लोक बनल कुच्चा छै लोडहपर हाथ जकर अगबे सब लुच्चा छै कहने छल जत्ते छै खधिया हम पाटि देब वैषम्यक ठाढ मुदा पर्वत समुच्चा छै

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मैथिली गजल : चोख फार भेल छी

~धीरेन्द्र प्रेमर्षि~ घसाइत आ खिआइत चोख फार भेल छी गला-गला गात गजलकार भेल छी शब्दकेर महफामे भावक वर-कनियाँ लऽ सदिखन हम दुलकैत कहार भेल छी धधराक धाह मारऽ पोखरि खुनाएल अछि

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गजल : यो काठेघर फाल्नुपर्‍यो

~धिरेन्द्र प्रेमर्षि~ मूलै खामो मक्केको यो काठेघर फाल्नुपर्‍यो इँटैइँटको नयाँ घर बनाउन लौ थाल्नुपर्‍यो ।। सबै दाजुभाइका लागि बेग्लाबेग्लै कोठा एकै छतमुनि हुनेगरी जग हाल्नुपर्‍यो ।।

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मैथली गजल : जोरजुलुमसँ जे ने झुकए से भाले लगए पिअरगर यौ

~धीरेन्द्र प्रेमर्षि~ जोरजुलुमसँ जे ने झुकए से भाले लगए पिअरगर यौ इन्द्रधनुषी एहि दुनियामे लाले लगए पिअरगर यौ ठोरे जँ सीयल रहतै तँ गुदुर–बुदुर की हेतै कपार! एहन मुर्दा शान्तिसँ तँ बबाले लगए पिअरगर यौ

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गजल : संविधान नभए नि गजल चैँ लेखौँ साथी

~धीरेन्द्र प्रेमर्षि~ संविधान नभए नि गजल चैँ लेखौँ साथी गुन्गुनाई त्यै गजल माथ्लो सिढी टेकौँ साथी स्वप्न मात्र देख्दा पनि आँखा तिर्मिराइदिने अविवेकी सूर्यलाई हत्केलैले छेकौँ साथी

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अनूदित कथा : फुलबा-हरण

~रमेश रञ्जन~ अनुवादक : धीरेन्द्र प्रेमर्षि सिङ्गो गाउँ अत्तर छर्किएझैँ मग्मगाइरहेको थियो। साँझ्पख रातरानी फूलको सुगन्ध नै त्यस्तै। सबै आफ्नै पाराले सुवास लिने प्रयत्न गरिरहेका थिए। चार बजेदेखि स्टेज बनाइँदै थियो। लाउडस्पिकरमा थरी-थरीका फिल्मी गानाका साथै भोजपुरी र मैथिली

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