Category Archives: थारू गजल

थारू भाषी गजल : पर्ख नि हुइ आब

~बुद्दिराम चौधरी~ आघ बर्ही सङ्घारी हुक्र पाछ पर्ख नि हुइ आब / नि हच्की नि डराइ यी ब्यालम डर्ख नि हुइ आब // लिखाइ अधिकार सम्बिधानम पहिचान सहित के / जितिह ेरहल्म फे हम्र सक्कुज मर्ख निहुइ आब //

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थारू भाषी गजल : कठु जाँरक भंक्री

~एम के कुसुम्या~ निदेलसे घरक मनै छोर्देम कठु जाँरक भंक्री कबु काल रिस लग्था फोर्देम कठु जाँरक भंक्री मै मटोर्या अस्त बातु जाँर निहोक निसेक्तु मै देना बा त देओ नै त चोर्देम कठु जाँरक भंक्री

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थारू भाषी गजल : पच्छिउँ से जागी हम्र युवा

~सुरज बर्दियाली~ उत्तर दख्खिन पुरुब पच्छिउँ से जागी हम्र युवा// समाज विकासके कर्तव्यसे जिन भागी हम्र युवा// बुँदा बुँदा पानी मिल्क जस्तक बनट समुन्दर, असम्भव हे मिल्के सम्भव बनाए लागि हम्र युवा//

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थारू भाषी गजल : तुह कहाँ रहो ?

~सीता थारू ‘निश्छल’~ जिन्दगीमे दर्नैं चिठ्ठा, तुह कहाँ रहो ? तुहिनहे मँग्नु भिक्षा, तुह कहाँ रहो ? हातमे लैके बरमाला ओ सेंदुर–टीका घनि–घनि दर्नैं झिँका, तुह कहाँ रहो ?

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