Category Archives: थारू कविता

थारू भाषी कविता : डहरचन्डीक बन्क

~सुशील चौधरी~ जन्नीह चिमचाम डेख्क जिन झंख्रहो ठर्वा, पटोहिया मौन बा कैक जिन डँक्रहो छावा, डाइ निब्वालठो कैक जिन ठौकहो बाबा । छाई मु सिलबाटिस् कैक जिन ढम्क्यइहो डमन्ड्वा,

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थारू भाषी कविता : खै, कहाँ बा भ्यालेन्टाइन !?

~लक्की चाैधरी~ बजारमे हल्ला बा, कति हुँ आइल बा भ्यालेन्टाइन ! एहोर ओहोर हेर्नु कोनुवा कप्चा निहर्नु नै लागल नजर कहुँ मनहे पुछ्नु खै, कहाँ बा भ्यालेन्टाइन !? बजार चोक चिया पसल, सडक गल्ली

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थारू भाषी कविता : सविनयाँ

~लक्की चाैधरी~ सवनियाँ गदरवा वर्खाबुन्दी बर्सल । कजरिया थर्कल बद्री जीउ माेर तर्सल ।। बर्का पानी बरसल अइसिन जाेर । मच्छीमारे गैलीगाेही खवइली झाेर ।।

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थारू भाषी छन्द कविता : कहाँगिल अगहनिया नेन्धर ?

~लक्की चाैधरी~ छन्द : सवाई  कहाँगिल अगहन, थारुनके रीति ? हेरागिल हेर्तीहेर्ती, नेन्धरके मिति ?? भुलेलग्ली संसकृति, हेर्तीहेर्ती हम्रे । धेरजन्ना होकेहोकी, नैसेकली सम्ह्रे ।।१।। ढिक्रीबेचे जाइदुल्ही नातनके घर । निसफिक्री होकेबैठी नैरहिन डर ।। सबओर स्वतन्त्रता मनलग्ना दिन ।

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थारू भाषी कविता : आपन भाषाहे छातीसे लगुइयन्

~अनिल चौधरी~ आपन भाषाहे छातीसे लगुइयन्, आपन अङ्नाहे देउना-बेब्री से सजुइयन्, कौन गल्लीमे हेराइल बटो, कौन कोन्टीमे खुस्टल बटो, दिन महिना बरस बीत गैल्, अब ते तोहार पहिचान फेन मेट गैल् /1/

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