मैथिली मुक्तक : उलझन

~विनीत ठाकुर~Binit Thakur

दहेज सँ खरिदल दुलहा पर भाग कि निक
निशारात्रि मे अनोना दुलारक राग कि निक
अखनो ई ओ नै भेटल से सुनी रोज उलहन
एहन उलझन मे जोरल जिनगीक ताग कि निक ?

मिथिलाक्षर ( तिरहुता लिपि ) मे सेहो :

 

 

 

 

 

 

विनीत ठाकुर
मिथिलेश्वर मौवाही–६, धनुषा

(स्रोत : रचनाकार स्वयंले ‘Kritisangraha@gmail.com‘ ईमेलमा पठाईएको । )

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