मैथिली कविता : प्रजातन्त्र रामलीलाक मञ्च

~रोशन जनकपुरी~Roshan Janakpuri

सन्दर्भ : वर्तमान

१) देश

जे ऊपर सँ सौँस होइछै
आ भीतर सँ
फाँकफाँक ।

२) राजनीति

जे दिन मे ऑक्सीजन फेकैत अइछ
आ राइत मे कार्बन डाइआक्साइड ।

३) नेता

साँपक कण्डमे लसकल छुछुन्नैर
जकरा घोंटू तेँ पेट फाटक डर
उगलू तँ आन्हर हेबाक डर ।

४) जनता

जुआरी के टेबुल पर छिड़ियाएल रुपैया
जे कखनो एक गोटेक जेबी मे
तँ कखनो फेर टेबुल पर
आ कखनो दोसर जेबी मे पहुँच जाइत अइछ ।

५) प्रजातन्त्र

रामलीलाक मञ्च
जतए राम गजरैत अइछ,
रावण सेहो गजरैत अइछ
आ अन्हार मे बैसल दर्शक
टुकुर टुकुर तकैत अइछ ।

(स्रोत : Esamata)


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