मैथिली कथा : अग्‍निपुष्‍पके गुच्‍छासब

~रोशन जनकपुरी~Roshan Janakpuri

दुश्‍मनके नाइट भिजन हेलिकप्‍टर सँ राइत भइर बमबारी के बादो जनसेनाद्वारा कएल गेल घेराबन्‍दी नइ टुटल रहइ । जेना सिनेमा मे होइछै, चहुदिस पसरल अन्‍हारमे एम्‍हर बम खइस रहल अइ, ओम्‍हर बम खइस रहल अइ आ लोकसब दौड रहल अइ चइल रहल अइ , तहिना शाही सेना के घेराबन्‍दी कएने जनसेना मुख्‍य मोर्चा पर लइड रहल छल । युद्ध मोर्चामे एकटा खपरैल स्‍कूल के एकटा कोठरी के प्राथमिक अस्‍पताल बना क घायल जनसैनिकसबके प्रारम्‍भिक उपचार क क युद्धक्षेत्र सँ बाहर पठाओल जा रहल छल ।

ई काजरो सँ कारी अमवस्‍या के राइतबला अन्‍हरिया राइत के बम के विस्‍फोट आ स्‍वचालित हथियारसब स कखनो निरन्‍तर कखनो रूइक रूइक क फुलझडी जकाँ निकलल गोली सब के लाल पियर बैगनी इजोत मात्र प्रकाशित करैत छल। नइ त लम्‍बा मीलो पसरल सुखलका नदी के ओ क्षेत्र अन्‍हारे मे युद्धक साक्षी बइन रहल छल । युद्धक मुख्‍य मोर्चा बनल चूरे पर्वत श्रेणी के ओहि टिला स आइब रहल बम मसिनगन आ विविध आग्‍नेयास्‍त्रक समवेत भयावह आवाज एना बुझाइत छल जेना अअनेको ज्‍वालामुखी एक साथ फूइट रहल हो । आअ ोतह उइठ रहल आर्त चित्‍कार , क्रन्‍दन, नरकक आभास दइत छल ।…

ठीके युद्ध नरके होइत अइछ ।–एकटा घायल जनसैनिकके स्‍ट्रेचर पर सुताक दू गोटेके कन्‍हा पर रखैत हम बजलहुँ ।

अहाँ ठीक कहलहुँ , मुदा एहि नरकके समाप्‍तिक हेतु ई बाध्‍यात्‍मक युद्ध अछि । हमरा सहयोग क रहल प्रारम्‍भिक अस्‍पतालक रेखदेखक लेल नियुक्त कयल गेल कमाण्‍डर बाजल ।बगल स निर्देशनात्‍मक आवाज आएल–ठाढे ठाढे नइ, बेन्‍ड भ क डाँड मोइडक । अन्‍हारमे आँइख चियाइर क देखलियै, स्‍थानीयबासीसब आबाल वृद्ध युद्धक्षेत्र स बाहर भाइग रहल छल आ जनसैनिक आ युद्ध सहयोगी सब ओकरा सबके सुरक्षित पलायन मे सहयोग क रहल छल । करिब आधा किलोमीटर चौडाइबला एहि सुख्‍खल नदीके पछियारी किनारा सुरक्षित छल । ओकरा ओइकात एकटा छोट गाम छल जतह शरण लेल जा सकैत छल ।

फायर के गर्जनयुक्त आदेश सँगे शुरु भेल लडाइ भोर के करिब साढे तीन बजे तक चलल । भोरका इजोत शाही सेना के अतिरिक्त बल मगाब मे सहयोगी भ सकैत छल आ शायद अहि दुआरे रिट्रीट (लौटबाक) आदेश आएल ।युद्ध क मुख्‍य मोर्चा पर निरन्‍तर विस्‍फोट आ फायरिंगक लयबद्धता टुइट रहल छल । स्‍वास्‍थ्‍य मोर्चा पर नियुक्त आ सहयोगी व्‍यक्तिसब लौटैट जनसैनिक सबके अन्‍हारमे ठिकियाक चिन्‍हबाक कोशिस क रहल छल । ओकर चिन्‍हल लौट रहल अइछ कि नइ ? ई प्रश्‍न आ उत्‍सुकता सबहक चेहरा पर नाइच रहल छल ।युद्ध मोर्चा क समाचार आब चारुदिस पसैर रहल छल । जनसेनाक तीन तरफा मजबूत घेराबन्‍दी मे परल शाही सेना के एक सय अठारह जवानबला जत्‍था मे स कम स कम चौंसठ गोटे मारल गेल छल ।

ओ त करिब एक्‍के डेढ बजे दुश्‍मन निःसहाय भ क आत्‍मसमर्पण के मुद्रा मे एकटा कोना मे दुबैक गेल छल । हम सब त दू घण्‍टा स अन्‍हारे मे अपने मे फायरिंग क रहल छलहुा । जाँघ मे छर्रा लाइग क घायल एकटा सैनिक बाजल– नइ त जीत निश्‍चित छल ।

युद्ध के अधूरा छोरबाक चिरचिराहट प्रायः सब के चेहरा पर छल , जे लौटैत आ घायल सैनिकके स्‍थलगत देखरेखमे भेल तिल मात्र कोताही के बाद क्रोध पूर्ण व्‍यवहार मे प्रकट भ रहल छल ।

एहि भीषण युद्ध मे जनसेना दिस चालीस स बेसी घायल भेल छल आ पचीस गोट शहादत प्राप्‍त कयलक ।

।जनसेना के ई सिपाही सब जनता के ओह वर्गक धियापुता सब अइछ जे शासन आ अभिजात्‍य तथा सम्‍पन्‍न वर्गक पकडबला समाजद्वारा युग युग स कछेर पर ठाढ क देल गेल अइछ । एकरा सबके नइ कोनो दरमााक मोह नइ कोनो नीजी सुख सुविधाके मोह । बस एक्‍केटा आस जे जनयुद्ध सफल होएत त घूरत । सुखके दिन टुटली मरैया तक पहुँचत । लूट आ शोषण बला शासन अन्‍त होएत । लाल सलाम, जनताके सर्वोत्तम धीया पुता सब ।लाल सलाम , महान शहदि सब ।।–अपने आप हमर कसल मुठी सलामीक मुद्रामे अकाश दिस उइठ गेल । भोरका इजोत होब लागल छल । नदीके पछियारी काते काते दक्षिण दिस जाइत हम सब युद्ध मोर्चा स क्रमशः दूर होइट जा रहल छलहुँ । दुश्‍मनके अतिरिक्त बल हेलिकप्‍टर स पहुँच चुकल छल । मुदा शायद जनसेनाके वीरता स संत्रस्‍त दुश्‍मनके फाइटर हेलिकप्‍टर आकाशमे घुइम घुइमक एखनो तक बम खसाइए रहल छल । हमरा संगे चइल रहल एकटा कम्‍पनी कमाण्‍डर पाछु स हमर पिठ्ठी थपथपएलक ।आकाश दिस उठैत हमर कसल मुठ्ठी ओ देखि नेने छल ।उनैटक हम तकलहुँ । शायद ओ हमरा मन मे उठैत भावके पइढ लेने छल । राइत भइरके युद्धक थकान संगहि ओकरा आँइखमे उदासी सेहो छल । शायद ओकरो मनमे हमरे जकाँ भावसब उमइर घुमइर रहल छल । ओ कमाण्‍डर छल युद्ध मोर्चाक । ओकरो नेतृत्‍वमे युद्ध भेल छल जाहिमे सेहो शहीद आ घायल भेल छल कइएकटा जनसैनिक । के सब शहीद भेल? क ीओ जनैत अइछ? ….निश्‍चय ओ जनैत अइछ । ओकर आँइखक उदासी सैह कहैत अइछ । के सब भ सकैत अइछ? –मन भेल पुइछतिअइ, मुदा पुछलहुँ नइ, आ चलैत रहलहुँ चुपचाप ।

एहि सुखलाहा नदी के पछयारी कातक जंगलमे युद्धक तैयारी आ प्रशिक्षणक अनितम क्षणमे जनसेनाके जवान सबके एकटा बटालियनके सलामी स्‍वीकार करैत आ जवान सबस गर्मजोशी पूर्ण कडगर हाथ मिलाक बिदा करैत काल मनमे उठल भाव याद परल –एहिमे स के लौटत के नइ लौटत ? चिन्‍हल चेहरा सब एक एक क आँइखक आगू घूमए लागल । महोत्तरीके बुधनी , जकर पार्टी नाम छल कमरेड उष । तीन वर्ष पहिने पार्टी प्रवेश करैत कालके अन्‍तरमुखी विधवा आ सम्‍पत्तिक कारण अपन सासुर स प्रताडित बुधनी युद्ध प्रशिक्षणक क्रममे एक दिन हमरा कहने छलिह– कमरेड, सुबोध कमरेड हमरा प्रेम प्रस्‍ताव कएने अइछ कमाण्‍डरके हम सब संयुक्त आवेदन सेहो देने छी । जौं सब ठीक रहल त तीन महिनाके बाद हम सब विवाह करब । अहाँ जतह रही , अहाँके आब परत ।

गोर, हसमुख रेशबहादुर मगर याद परल , धनुषामे जकर पत्‍थर कूटएबाली विधवा बुढिया माय कनैत कहने रहइ–बौआ, तों त पहाडमे लड चइल जाइछे, मुदा हमरा के ओ देख बला नइ रहि जाइए ।बोखार लगला पर दबाइयो देब बला के ओ नइ रहि जाइए । मुदा ओ युद्ध स नइ लौटल । एकटा कवितामे ओ लिखने रहए– माय , हम नइ चाहैछी कोनो माय पत्‍थर कूटो, तय हम युद्ध मे छी ।

हमरा याद परल ओ नेवार्नी करिकबी दुबर पातर कमरेड कामिनी , जकरा मजदूर पतिके शाही सेना सब माओवादी होबके शंका मे निर्ममतापूर्वक पिटिपिटिक माइर देलकै । आ ओ अपन दू टा अबोध बच्‍चाके नाना नानी ग ध के जनसेनामे सामिल भ गेली ।हमर अनेको चिन्‍हल जानल सबमे स ई करिकबी नेवार्नी अत्‍यन्‍त प्रिय छलिह । ओ हमरे नइ सबहक प्रिय छलिह । कम मुदा मृदुभाषी, प्रत्‍येक मोर्चा पर सबस आगू बइढक लडनिहार । तैं सब कमाण्‍डर सब हुनका अपने समूहमे राख चाहैत छल ।
एक बेर हम बिमार भेल छलहुँ, बेहोश रहलहुा कए दिन । एहन अवस्‍थामे ओ हमर सब तरहक सेवा कएने रहथि । दोसर हुनक वर्गीय प्रेम आ बौद्धिकता हमरा हुनका संगे भावनात्‍मक सम्‍बन्‍ध बना देने छल । हम दाई (भैया) छलहुँ आ ओ छलिह बहिनी( बहिन) ।

दाई , आई हमरे क्‍याम्‍पमे खाउने ।–युद्धस एक दिन पहिने ओ हमरा नेओत देने छलिह । हम हँसिक आगू बइढ गेलहुँ, मुदा ओ दौडक हमरा मूँहमे माँउस एकटा टुकडा राइख देलनि आ हँस लगलिह ।…..एहन बहुतराश चिन्‍हल चेहरा आँइखक आगू नाच लागल ।

ककरो चिनहलियै की ? के सब शहीद भेल ? –रहल नइ गेल, आ सँगे चलैत कम्‍पनी कमाण्‍डरस हम पुछिए लेलियै ।

ओ किछु बाजए ओहिस पहिने हम दोसरो प्रश्‍न कयलियै जाहिमे हमर चिन्‍हल जानल कतेको नाम छल । भावना जेना हमरा गरसि रहल छल । राइतक युद्ध मोर्चाक कमरेड हम एकटा सामान्‍य मानवमे बदइल रहल छलहुँ ।

ओ किछु नइ बाजल । ओकर आँइखक उदासी ओहिना गँहीर छल । ठोर जेना कइसक बन्‍द छल । ओ निःशब्‍द चलैत रहल ।

दोसर दिन । किछु शहीद सबके लाश प्राप्‍त भेल छल । हमरा जानकारी भ चुकल छल– रेश बहादुर आ कमरेड कामिनी शहीद भ चुकल छलिह । कमरेड कामिनी बायच सकैत छलिह मुदा एकटा घायल जनसैनिकके सहारा द क लबैत काल हुनका गोली लागल छल ।

हमर मन भावना स भइर गेल छल । कमरेड कामिनीके स्‍मृति हमरा विचलित क रहल छल । निर्मम युद्धके भावना स कोनो मतलब नइ होइछै

सब शहीद सबके लाश सबके हसुवा हथौडी बला झण्‍डा ओढाओल गेल, सलामी देल गेल आ शहीदक चिता धुधुवा उठल । थाकल पैर आ भारी मन स हम सब सेल्‍टर दिस लौटलहुँ । मन नइ लाइग रहल छल । ओ कम्‍पनी कमाण्‍डर हमरा सँगे छल । ओ अखनो उदास आँइख नेने चुप छल । भावना स द्रवित मन एन भरल छल जेना सब किछु रुइक जाएत । अपन क्‍याम्‍पमे प्रवेश कयलहुँ त किछु पुरुष आ दू टा युवती प्रतिक्षा क रहल छलिह । हमर सहायक जानकारी करौलक जे ई सब जनसेनामे सामिल भेल नव कार्यकर्ता अइछ । मूँडी उठाक एकटा युवती के पुछलियै–की नाम अइछ?

रुपकुमारी : दोसरके सेहो पुछलियै –आ अहाँ के की अइछ ?

कामिनी : हम ओकर मूँह तकैत रहलहुँ , किछु काल निर्निमेष । फेर फूर्तिस क्‍याम्‍प स बाहार निकललहुँ आ ओहि कम्‍पनी कमाण्‍डरके जोडस बजैलियइ आ कहलियै–आउ कमरेड, देखियौ , कामिनी जीविते अइछ ।
हँ , कमरेड। शहीद सब अमर होइत अइछ ।–ओ बाजल ।

गोर मूहँबाली मैथिलानी कामिनी क्‍याम्‍पकद्वार पर स हमरा देखि रहल छलिह । आ हम देखि रहल छलहुँ क्‍याम्‍पक आगू मे फर्फराइत ललका झण्‍डाके मैथिलानी कामिनीके आ एम्‍हर ओम्‍हर गतिशील आ पुनः लयबद्ध होइत जनसेनाके पंक्ति सबके । हमर
सहायक धीरे स बाजल–शाही सेना मे मरबलामे एकटा हमर सबहक कम्‍पनी कमाण्‍डरक जेठ भाय से हो छल । आब हमर दृष्‍टि ओहि कमाण्‍डर पर स्‍थिर छल । ओकर आँइखक गँहीर उदासीक अर्थ आब हमरा लाइग रहल छल । ललका झण्‍डा अकाशमे र्फफराइए रहल छल, आस्‍था मन मे आर गँहीर भेल जा रहल छल । आ विश्‍वास पर एकटा आओर ईट रखा गेल –टुटली मरैया सके जीत निश्‍चित अइछ ।

दोसरके सेहो पुछलियै –आ अहाँ के की अइछ ?

कामिनी : हम ओकर मूँह तकैत रहलहुँ , किछु काल निर्निमेष । फेर फूर्तिस क्‍याम्‍प स बाहार निकललहुँ आ ओहि कम्‍पनी कमाण्‍डरके जोडस बजैलियइ आ कहलियै–आउ कमरेड, देखियौ , कामिनी जीविते अइछ ।

हँ , कमरेड। शहीद सब अमर होइत अइछ ।–ओ बाजल ।

गोर मूहँबाली मैथिलानी कामिनी क्‍याम्‍पकद्वार पर स हमरा देखि रहल छलिह । आ हम देखि रहल छलहुँ क्‍याम्‍पक आगू मे फर्फराइत ललका झण्‍डाके मैथिलानी कामिनीके आ एम्‍हर ओम्‍हर गतिशील आ पुनः लयबद्ध होइत जनसेनाके पंक्ति सबके । हमर सहायक धीरे स बाजल–शाही सेना मे मरबलामे एकटा हमर सबहक कम्‍पनी कमाण्‍डरक जेठ भाय से हो छल । आब हमर दृष्‍टि ओहि कमाण्‍डर पर स्‍थिर छल । ओकर आँइखक गँहीर उदासीक अर्थ आब हमरा लाइग रहल छल । ललका झण्‍डा अकाशमे र्फफराइए रहल छल, आस्‍था मन मे आर गँहीर भेल जा रहल छल । आ विश्‍वास पर एकटा आओर ईट रखा गेल –टुटली मरैया सके जीत निश्‍चित अइछ ।

(स्रोत : Maithali Katha)

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